पहले हल्ला बोलती थी, अब खामोशी के साथ आगे बढ़ रही है सपा
शबी हैदर
हल्ला बोल आंदोलन से पैदा हुई सपा ने वक्त और हालत को देखते हुए अपनी रणनीति बदल दी है। आक्रमक तेवरों और विशाल धरना प्रर्दशन का वृहद इतिहास की साक्षी समाजवादी पार्टी अब जमीन पर ठोस काम कर रही है। कम से कम करोनाकाल में सपाईयों का प्रर्दशन तो यही बता रहा है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कोरोना विकटिम की खुल कर मदद की और इसका ढ़िढोरा नहीं पीटा। वही पूर्व सांसद डिंपल यादव भी चुपचाप प्रावासी मजदूरों की मदद करती रही और लोगों को कानो—कान ख़बर नहीं होने दी। यह तो बात हुई शीर्ष नेतृत्तव की वहीं अगर सपा के सिपाहियों की बात की जाए तो मोहम्मद एबाद सरीखे नौजवानों ने लाकडाउन अवधि में प्रतिदिन सैकड़ों स्थानिये निवासियों को शाम का खाना खिलाया और इसकी चर्चा तक नहीं की।
कोरोना काल में की गयी सपाईयों की मदद अब लोगों के दिलों में उतरती हुई दिखाई दे रही है और मदद पाए लोग खुले दिल से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि तमाम सियासी दलों में सपा जमीनी मददगार के तौर पर पहले पायदान पर है।
क्यों बदली रणनीति
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव इस बात को काफी लंबे समय से दोहरा रहे हैं कि मीडिया का चरित्र और चेहरा बदल गया है। तटस्थ मीडिया नाम की कोई संस्था अब रह नहीं गयी है और चीजों को देखेने का नजरिये दोहरा है। लिहाज वह सार्वजिनक मंच से कह चुके हैं कि सोशल मीडिया एक ब्राडकास्टर है और लोगों को चाहिए कि वह इस प्लेटफार्म का बेहतर इस्तेमाल करें। नामी संस्थान भी अपनी खबरों की रीच को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इन्हीं प्लेटफार्म का इस्तेमाल करती है। लाकडाउन अवधि में लोगों ने अखबार लेना बंद कर दिये है और न्यूज चैनलों की रटी रटाई थ्योरी से पक चुके हैं। इसलिए सपा के लोग अब बिना हल्ला बोले व्यक्तिगत आधार पर लोगों के बीच जा रहे हैं।