जय भीम के साथ जय मीम बोलने का आया मौसम!
11 November, Sarkar Today: बदलते राजनीतिक मौसम (Rajnitik Mousam)में लगता है जय भीम के साथ जय मीम बोलने का समय आ गया है। अकेली पड़ती मायावती और राजभर का साथ टूटने के बाद असददुदीन औवेसी को किसी साथी की तलाश है। और उनके लिए मायावती से बेहतर और कौन दूसरा साथी हो सकता है। राजनीतिक मौमस (Rajnitik Mousam) इस ओर इशारा कर रहा है कि दलित और मुस्लमानों का दम यदि एक साथ लग जाए तो किसी भी सियासी दल के राजनीतिक गणित गड़बड़ा सकता है। बस यही फर्मूला दोनों नेताओं को एक मंच पर आने के लिए बेकरार कर रहा है। असददुदीन औवेसी तो मायावती की तरफ अपना हाथ बड़ा चुके हैं। अब फैसला मायावती को करना है कि वह सियासी पार्टनरशिप करती है या फिर अकेले चुनाव में जाने का साहस। (Rajnitik Mousam)
जिस यूपी में वर्ष 2012 तक का राजनीतिक मौसम बहन मायावती के साथ था और यूपी में उनका सिक्का चलता था। लेकिन उसी यूपी में राजनीतिक मौसम (Rajnitik Mousam) ने करवट बदल ली और आज बहन जी अपनी सियासी जमीन बचाने की कोशिशों में लगी है। यूपी में अपनी बादशाहत बरकरार रखने के लिए बहन जी ने सपा तक से हाथ मिलाया। यह अलग बात है कि सपा और बसपा का गठबधंन कुछ खास नहीं कर पाया। अब एक बार फिर जब सारे दलों ने अपनी अपनी रणीनति बना ली है और वह आगे बढ़ रहे हैं तो बहन मायावती भी किसी नये गुणा—गणित की ओर अग्रसर है। (Rajnitik Mousam)
औवेसी भी बैरिस्टर है और बसपा के राष्ट्रीय महासचिव एससी मिश्रा भी नामी बैरिस्टर है। तो क्या दो बैरिस्टर एक ही जैसा सोच रहे हैं। सही पकड़ा आप ने। राजनीतक सूत्र इस ओर इशारा कर रहे हैं कि बसपा और एआईएमएम के बीच बातचीत बातचीत चल रही है और यदि कोई मामला नहीं फंसा तो दोनों दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। औवेसी यूपी की 100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। (Rajnitik Mousam)
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